अब्रहा सललललाहे अलैहे वसल्लम
इस्लाम नाज़िल होने से तक़रीबन अस्सी साल पहले का वक़ेआ है कि अब्रहा नाम का कोई हुक्मरां मक्के में काबा पर अपने हाथियों के साथ हमला वर हुवा था. किंवदंतियाँ हैं कि उसकी हाथियों को अबाबील परिंदे अपने मुँह से कंकड़याँ ढो ढो कर लाते और हाथियों पर बरसते, नतीजतन हाथियों को मैदान छोड़ कर भागना पड़ा और अब्रहा पसपा हुवा.
यह वक़ेआ ग़ैर फ़ितरी सा लगता है मगर दौरे जिहालत में अफ़वाहें सच का मुक़ाम पा जाती हैं.
वाजः हो कि अल्लाह ने अपने घर की हिफ़ाज़त तब की जब ख़ाना ए काबा में 360 बुत विराजमान थे. इन सब को मुहम्मद ने उखाड़ फेंका, अल्लाह को उस वक़्त परिंदों की फ़ौज भेजनी चाहिए था जब उसके मुख़्तलिफ़ शकले वहां मौजूद थीं.
अल्लाह मुहम्मद को पसपा करता.
अगर बुत परस्ती अल्लाह को मंज़ूर न होती तो मुहम्मद की जगह
अब्रहा सललललाहे अलैहे वसल्लम होता.
यह मशकूक वक़ेआ भी क़ुरआनी सच्चाई बन गया और झूट को तुम अपनी नमाज़ों में पढ़ते हो?
सूरह फ़ील
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