Monday, February 18, 2019

धर्म और मज़हब - - - सच्चाई के आईने में -79


 मुसलमान ख़ुद पर जदीद इलाज हराम करें 

मैं एक मुस्लिम का बेटा हूँ और स्वाभाविक रूप में एक मुस्लिम कालोनी में अपनी ज़िम्मेदारी उठाते हुए रहता हूँ. कालोनी में एक मस्जिद है, 
बनते वक़्त जिसका मैंने विरोध किया था कि कालोनी मंदिर व् मस्जिद से पाक हो. 
इसके लिए बिल्डर ने हमसे भी दस हज़ार रुपए का अतिया लेकर फ्लैट दिया था. 
मैंने उसे समझाया अतिया जबरन नहीं ली जाती, मगर वह राज़ी नहीं हुवा. 
मेरे अपने परिवार की मज़बूरी थी. 
मै नमाज़ रोज़ा नहीं करता न ही मुहम्मदी अल्लाह को तस्लीम करता हूँ. 
मस्जिद का मेंटेननेस देने से इंकार कर दिया जिसे कट्टर लोगों ने 
मुझ पर लागू कर दिया. 
बक़रीद की क़ुरबानी नहीं कराता, यह बात अलग है कि 
मैंने कालोनी के पार्क में दो संग मरमर की बेन्चें लगवा दीं. 
सुसाइटी की ज़िम्मेदारियाँ हमारी फ़ेमिली संभालती रही. 
अख़लाक़ी तौर पर हमारी फ़ेमली समाज के ज़िम्मेदार तरीन लोग हैं. 
पिछले दिनों मैंने इरादा किया कि मरने के बाद मैं अपना शरीर मेडिकल कालेज को दान कर दूं, मेरी फ़ेमिली इसके लिए ख़ुशी के साथ राज़ी हो गई, 
स्टाम्प पेपर भरा गया, पत्नि, बेटियों और बेटों ने रज़ामंदी के दस्तख़त किए, 
अब ज़रुरत हुई कि दो मुकामी लोग मुझे इंट्रोड्यूस करें, 
मैंने कालोनी के ही दो लोगों को पकड़ा जो मेरी तरह ही बूढ़े थे और जिनसे मेरी बनती भी थी. उन्होंने मेरे काम की तो सराहना की मगर इंट्रोडकशन देने से इंकार कर दिया कि यह बात इस्लाम के ख़िलाफ़ है. 
उनकी सोच यह कि इस काम से वह ग़ुनहगार होंगे और अल्लाह उनको पकड़ेगा.
ग़ुनाह का पसे मंज़र बतला दूं - - - 
कि मरने के बाद मुन्किर नक़ीर (यम राज) मुझे क़ब्र में नहीं पाएँगे तो हिसाब किताब किस से करेंगे. 
मैंने मेडिकल कालेज में अपने मुर्दे को दान करके अल्लाह और मौत के फ़रिश्ते को ग़ुमराह किया है. वह अल्लाह को जवाब क्या देगा और अल्लाह मुझ ग़ुनहगार को सज़ा कैसे दे पाएगा ?
सर्व शक्तिमान अल्लाह इतना कमज़ोर कि मुझे क़ब्र के बाहर तलाश नहीं कर सकता. सर्व शक्तिमान अल्लाह आख़िर मुझे ऐसी सोच ही क्यों दी जो वह अपने बन्दों से नहीं चाहता ??
सर्व शक्तिमान अल्लाह मेडिकल साइंस के अंदर इंसानों कि भलाई में लिए तह दर तह राज़ पोशीदा किए हुए है और दूसरी तरफ़ मज़हब हमें अपने नाकारा और मुर्दा जिस्म को डाक्टरों कि तालीम के लिए देने से मना कर रहा है ?
इन विरोधा भाषों के चौराहे पर मुसलमानो का कारवाँ सदियों से अटका हुवा है.  
मुसलमानो को राहे-रास्त तब ही मिल सकती है कि इनको तमाम नई ईजादों की बरकतों से महरूम कर दिया जाए.  
यही इनका इलाज है.  
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