Sunday, February 10, 2019

धर्म और मज़हब - - - सच्चाई के आईने में -73

 सिर्फ़ मोमिन 

मेरे भाइयो ! बहनों ! मेरे बुजुगो!! नौ जवानों!!!
मेरे मिशन को समझने की कोशिश करो. मैं आप में से ही एक बेदार फ़र्द हूँ जो आने वाले वक़्त की भनक पा चुका है कि अगर तुम न जगे तो पामाल हो जाओगे. 
मैं कहाँ तुमको ग़ुमराह कर रहा हूँ ?
तुम तो पहले से ही ग़ुमराह हो, 
मैं तो तुम से ज़रा सी तब्दीली की बात कह रह हूँ कि 
मुस्लिम से मोमिन बन जाओ, 
सब कुछ तुम्हारा जहाँ का तहाँ रहेगा, 
बस बदल जाएगा सोचने का ढंग. 
जब तुम मोमिन हो जाओगे तो तुम्हारे पीछे तुम्हारी तक़लीद में होंगे ग़ैर मुस्लिम भी. 
और इस तरह एक पाकीज़ा क़ौम वजूद में आएगी, 
जिसको ज़माना सर उठा कर देखेगा कि यह मोमिन है, 
पार दर्शी है, अनोखा है.
सिकंदर दुन्या को फ़तह करते करते फ़ना हो गया, 
हिटलर ग़ालिब होते होते मग़लूब हो गया, 
इस्लाम अब इसी मुक़ाम पर आ पहुंचा है, 
अल्लाह के नाम पर मुहम्मद ने इंसानियत को बहुत नुक़सान पहुँचाया है, 
उसका ख़ामयाज़ा आज एक बड़ा मानव समाज और पूरी दुन्या में भुगत रहा है, 
जो तुम्हारी आँखों के सामने है. 
यह ग़ुनह गार ओलिमा और उनके एजेंट ग़लत प्रोपेगंडा करते हैं 
कि इस्लाम योरोप और अमरीका में मक़बूल हो रहा है, 
यह इनकी रोटी रोज़ी का मामला है जिसके वह वफ़ा दार हैं 
मगर तुम्हारे लिए वह ग़द्दार हैं.
भूल कर मज़हब बदल कर हिन्दू, ईसाई या बहाई मत बन जाना, 
यह चूहेदानों की अदला बदली है. 
मज़हबी कट्टरता ही चूहे दान होती है. 
मेरे जज़बा ए मोमिन को समझो. 
मोमिन का दीन ही तुम्हारा दीन होगा. 
आने वाले वक़्त में.
***

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